Short Moral Stories in Hindi | बच्चों के लिए 21 नैतिक कहानियां

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Moral Stories in Hindi

Short Moral Stories in Hindi – नैतिक कहानी ( Moral Story ) ऐसी कहानी होती है, जिसमें किसी नैतिक या सामाजिक सिद्धांत को उजागर किया जाता है। इन कहानियों का उद्देश्य किसी अच्छे आचार-व्यवहार, जीवन के सही रास्ते, या सकारात्मक गुणों को प्रोत्साहित करना होता है। इन कहानियों के माध्यम से हमें अच्छाई, ईमानदारी, साहस, धैर्य, कर्तव्य, और दूसरों के प्रति सहानुभूति जैसी गुणों के महत्व का अहसास होता है। मोरल स्टोरीज बच्चों और वयस्कों दोनों के लिए प्रेरणादायक हो सकती हैं, क्योंकि ये समाजिक और व्यक्तिगत जीवन में सही रास्ता दिखाने में मदद करती हैं।

इन कहानियों में अक्सर एक समस्या या चुनौती होती है, और इसका समाधान किसी अच्छे और सही नैतिक निर्णय के द्वारा किया जाता है। इन कहानियों का उद्देश्य बच्चों को नैतिक शिक्षा देना होता है, जिससे वे जीवन में सही फैसले ले सकें और अच्छे इंसान बन सकें। उदाहरण के लिए, पंचतंत्र की कहानियाँ, जातक कथाएँ, लालच पर कहानियाँ, राजा-रानी की कहानियाँ और शेर-चूहे की कहानियाँ बच्चों को यह सिखाती हैं कि सही और गलत क्या है।

इन कहानियों को रात को सोते वक्त बच्चों को सुनाना, उन्हें अच्छे सपने देखने में मदद करता है और साथ ही जीवन के बड़े सबक भी सिखाता है। इन छोटी कहानियों के माध्यम से बच्चे नैतिकता, अनुशासन और सही रास्ते पर चलने का महत्व समझते हैं।

इसलिए, हम आपके लिए कुछ बेहतरीन शिक्षाप्रद हिंदी कहानियाँ लेकर आए हैं, जो आपके बच्चों को जीवन के महत्वपूर्ण सबक सिखाएंगी। अब इस पोस्ट में आप को कई नैतिक कहानियाँ ( Short Moral Stories in Hindi ) पढ़ने को मिलेंगी।

                                                                     नैतिक कहानी - प्यासा कौआ
Moral Stories In Hindi - Pyaasa Kaua


गर्मियों के एक दिन एक कौए को बहुत तेज़ प्यास लगी। वह पानी की तलाश में इधर-उधर उड़ने लगा, लेकिन उसे कहीं भी पानी नहीं मिला। तेज़ गर्मी के कारण उसकी प्यास और भी बढ़ने लगी, और वह काफी थक गया था। वह जीवन में उम्मीद खोने ही वाला था, लेकिन फिर भी उसने हार मानने का नाम नहीं लिया और पानी की तलाश में फिर से उड़ चला।

अचानक, उसे दूर एक पानी से भरा घड़ा नजर आया। यह देखकर वह खुशी से झूम उठा और जल्दी-जल्दी घड़े के पास पहुँच गया। उसने पानी पीने की कोशिश की, लेकिन वह नाकाम रहा, क्योंकि घड़े में पानी बहुत ही कम था। वह निराश हुआ, लेकिन तभी उसकी नजर एक कंकर पर पड़ी।

वह समझ गया और उसने अपनी चोंच से एक-एक कंकर उठाकर घड़े में डालने शुरू किए। धीरे-धीरे, कंकरों के कारण पानी ऊपर आ गया और कौए ने जी भर के पानी पिया। ताजगी का अहसास होते ही वह खुश होकर वहाँ से उड़ गया।

सीख - जब हम किसी चीज को पाने की इच्छा रखते हैं और उसे प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं, तो वह चीज हमें निश्चित रूप से मिल जाती है।
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Moral Story in Hindi
                                                                             नैतिक कहानी - मूर्ख गधा
Story For Kids In Hindi - Moorkh Gadha

एक नमक बेचने वाला रोज़ अपने गधे पर नमक की थैलियाँ लादकर बाजार जाता था। रास्ते में उसे एक नदी पार करनी पड़ती थी।

एक दिन, जब वह नदी पार कर रहा था, गधा अचानक नदी में गिर गया और नमक की थैलियाँ भी पानी में गिर गईं। पानी में गिरने से नमक घुलकर पानी में मिल गया और थैलियाँ बहुत हल्की हो गईं। अब गधा बहुत खुश हुआ क्योंकि उसे थैला हल्का महसूस हुआ और उसने सोचा कि अगली बार भी ऐसा ही होगा।

गधा फिर से वही चाल चलने लगा, जिससे नमक बेचने वाले को हर दिन काफी नुकसान होने लगा। नमक बेचने वाले को गधे की इस चाल का पता चल गया और उसने गधे को सबक सिखाने का निर्णय लिया।

अगले दिन उसने गधे पर रुई से भरी थैली लाद दी। गधा फिर वही चाल चलने की उम्मीद में नदी में गिर पड़ा। वह सोच रहा था कि रुई भी हल्की हो जाएगी, जैसे नमक की थैली हुई थी।

लेकिन, रुई पानी में भीगकर बहुत भारी हो गई और गधे को उसे लेकर बहुत कष्ट हुआ। गधा समझ गया कि इस बार उसका वही तरीका उल्टा पड़ा और उसने इस हादसे से एक अहम सबक सीखा।

उस दिन के बाद से गधा अपनी पुरानी चाल नहीं चला, और नमक बेचने वाला खुश हुआ कि अब उसे कोई नुकसान नहीं हुआ।

सीख - यह कहानी हमें यह सिखाती है कि जो एक बार काम करता है, वह हमेशा काम नहीं करेगा। हर स्थिति को समझकर और सोच-समझकर कदम उठाना जरूरी है।
                                                             नैतिक कहानी - सारस और लोमड़ी
A Moral Story in Hindi - saaras aur lomri


एक घने जंगल में एक लोमड़ी और सारस रहते थे। दोनों अच्छे मित्र थे और हमेशा एक-दूसरे के साथ समय बिताते थे। एक दिन लोमड़ी ने सारस से कहा, "नमस्ते सारस भाई, कैसे हो?"

सारस ने हंसते हुए जवाब दिया, "नमस्ते लोमड़ी बहन, मैं तो ठीक हूँ, तुम कैसी हो?"

लोमड़ी को शरारत सूझी और उसने सारस से कहा, "सारस भाई, मैं तुम्हें कल अपने घर दावत पर बुलाना चाहती हूँ। कल तुम मेरे घर खाना खाने आओ।"

दूसरे दिन सारस लोमड़ी के घर पहुँच गया। दोनों ने एक-दूसरे से मिलकर नमस्ते की और फिर बातें करने लगे। कुछ देर बाद लोमड़ी ने दो परातों में पतली-सी खिचड़ी बना कर लाकर सारस के सामने रख दी। लोमड़ी ने कहा, "सारस भाई, आओ खाना खाओ।"

लोमड़ी तो जल्दी-जल्दी खिचड़ी खाने लगी, लेकिन सारस अपनी लंबी चोंच से खिचड़ी नहीं खा सका। वह इसे अपनी चोंच में नहीं डाल पा रहा था। लोमड़ी ने यह देख कर मन ही मन खुशी महसूस की और झूठी चिंता दिखाते हुए बोली, "क्या बात है सारस भाई, तुम्हें खाना पसंद नहीं आया क्या?"

सारस ने लोमड़ी की चालाकी समझ ली और कुछ देर बाद उसे जवाब दिया, "लोमड़ी बहन, तुम कल मेरे घर खाना खाने आना।"

लोमड़ी ने खुशी से कहा, "हां, मैं जरूर आऊँगी।"

अगले दिन सारस ने मछलियाँ पकड़ी और उन्हें दो तंग मुँह वाली सुराहियों में डाला। जब लोमड़ी घर आई, तो दोनों ने एक-दूसरे से नमस्ते की और बातचीत करने लगे। फिर सारस ने सुराही उठाई और कहा, "लोमड़ी बहन, आओ मछलियाँ खाएँ।"

यह कहकर सारस ने अपनी चोंच सुराही में डाल दी और मछलियाँ खाने लगा। लोमड़ी ने देखा कि उसका मुँह इतना बड़ा है कि वह सुराही के छोटे मुँह में मछलियाँ नहीं निकाल पा रही थी। वह बस सारस को देखकर हैरान रह गई। अब लोमड़ी समझ गई कि सारस ने अपना बदला ले लिया था।

सीख - जैसे को तैसा
                                                                 नैतिक कहानी - एक बूढ़े व्यक्ति की कहानी
Small Story in Hindi - Ek Boodhe Vyakti Ki Kahanee


गाँव में एक बुढ़ा व्यक्ति रहता था, जिसे दुनिया के सबसे बदकिस्मत लोगों में गिना जाता था। उसकी अजीब हरकतें और निरंतर शिकायतें सभी को थका देती थीं। वह हमेशा उदास रहता, और उसका मन कभी संतुष्ट नहीं होता। जैसे-जैसे वह उम्र में बढ़ता गया, उसका दुख भी बढ़ता गया और उसके शब्द और भी तीखे हो गए।

गाँववाले उससे बचने लगे थे, क्योंकि उसकी नकारात्मकता और दु:खद स्वभाव के कारण उनका दिन भी खराब हो जाता था। उसके आसपास रहना उनके लिए अस्वाभाविक और असहज सा महसूस होता था। उसका दुख इतना गहरा था कि वह दूसरों में भी वही दुख फैला देता था।

फिर एक दिन, जब वह अस्सी साल का हो गया, एक हैरान करने वाली बात हुई। यह खबर पूरे गाँव में फैल गई: "आज वह बूढ़ा आदमी खुश था, उसने किसी बात पर शिकायत नहीं की, बल्कि पहली बार उसने मुस्कान दिखाई और उसका चेहरा भी ताजगी से चमक रहा था।"

गाँववाले उसके घर के बाहर इकट्ठा हो गए और उत्सुकता से उससे पूछा, "तुम्हें आज क्या हुआ है?"

बूढ़े आदमी ने शांत स्वर में जवाब दिया, "कुछ खास नहीं। अस्सी साल से मैं खुशी के पीछे भाग रहा था, लेकिन मुझे कभी वह नहीं मिली। फिर मैंने यह तय किया कि बिना खुशी के भी जी सकता हूं, और जीवन का असली आनंद उसी में है। तभी से मैं खुश हूं।"


सीख - खुशी के पीछे मत भागो, बल्कि जीवन का पूर्णता से आनंद लो।
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Short Moral Story in Hindi
                                                                      नैतिक कहानी - शेर और चूहा
Moral Stories In Hindi - Sher aur Chooha


एक बार की बात है, जंगल में एक शेर सो रहा था। उसी समय एक चूहा खेलते-खेलते शेर के ऊपर कूदने लगा और उसके शरीर पर उछलने लगा। इससे शेर की नींद में खलल पड़ा और वह गुस्से में जाग गया। शेर ने चूहे को पकड़ लिया और उसे खाने की सोची।

लेकिन, चूहा डर के बजाय शेर से विनती करने लगा, "कृपया मुझे छोड़ दो, एक दिन मैं आपकी मदद जरूर करूंगा।" चूहे की यह बात सुनकर शेर हंसा और उसे छोड़ दिया।

कुछ महीनों बाद, कुछ शिकारी शिकार के लिए जंगल में आए और उन्होंने शेर को जाल में फंसा लिया। शेर ने बहुत कोशिश की, लेकिन वह खुद को नहीं निकाल सका और बेचैन होकर जोर से दहाड़ने लगा।

चूहे ने शेर की दहाड़ सुनी और तुरंत उसकी मदद के लिए दौड़ा। वह शेर के पास पहुंचकर अपनी तेज़ दांतों से जाल को काटने लगा। जल्द ही शेर जाल से बाहर आ गया।

शेर ने चूहे का धन्यवाद किया और दोनों फिर जंगल की ओर चल पड़े, इस अनुभव से यह सिखने को मिला कि कभी किसी को छोटा नहीं समझना चाहिए।

सीख - इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि हमें एक-दूसरे की मदद करनी चाहिए और किसी को भी अनावश्यक रूप से परेशान नहीं करना चाहिए।
                                                                  नैतिक कहानी - लालची शेर की कहानी
Story For Kids In Hindi - laalachee sher kee kahaanee


गर्मियों के एक दिन शेर को बहुत जोर की भूख लगी। वह जंगल में इधर-उधर खाने की तलाश में निकल पड़ा। काफी देर तक खोजने के बाद उसे एक खरगोश मिला, लेकिन शेर ने उसे छोटा समझकर खाने की बजाय छोड़ दिया। वह सोचने लगा, "यह बहुत छोटा है, इससे क्या फायदा!"

फिर कुछ और समय बाद उसे एक हिरन मिला। शेर ने सोचा, "यह तो बड़ा है, मुझे इसे पकड़कर खाने में मजा आएगा।" वह हिरन के पीछे दौड़ा, लेकिन काफी समय से भूखा होने के कारण वह थक गया और हिरन को पकड़ नहीं पाया।

अब शेर के पास कोई भी भोजन नहीं था और वह वापस उसी स्थान पर लौटने लगा जहाँ उसने पहले खरगोश को देखा था। वह उम्मीद करता था कि शायद अब वह खरगोश वहीं मिलेगा, लेकिन जब वह वहां पहुँचा, तो देखा कि खरगोश जा चुका था। शेर बहुत दुखी हुआ और वह बहुत समय तक भूखा ही रहा।

सीख - इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि हमें लालच नहीं करना चाहिए।
                                                                            नैतिक कहानी - तीन मछलियाँ
Short Moral Stories in Hindi -Teen Machhaliyan


एक छोटी सी नदी में तीन मछलियाँ रहती थीं, जिनमें से हर मछली का रंग अलग था – एक लाल, एक नीली और एक पीली। ये तीनों मछलियाँ आपस में बहुत अच्छे दोस्त थीं और मिलकर साथ तैरती थीं।

एक दिन, जब नीली मछली नदी के किनारे के पास तैर रही थी, उसने मछुआरों की बातें सुनीं। मछुआरे कह रहे थे, "इस नदी में मछली पकड़ने का सही समय आ गया है। यहाँ बहुत सी मछलियाँ तैर रही होंगी। कल हम मछलियाँ पकड़ने जाएंगे!"

यह सुनकर नीली मछली बहुत चिंतित हो गई और तुरंत अपने दोस्तों के पास तैरते हुए गई। उसने कहा, "सुनो! मैंने मछुआरों को बात करते हुए सुना है। वे कल नदी में मछलियाँ पकड़ने आएंगे। हमें कल थोड़ी देर के लिए नदी छोड़कर कहीं सुरक्षित जगह पर चले जाना चाहिए!"

नीली मछली की बात सुनकर लाल मछली हँसते हुए बोली, "अरे, ये तो चिंता की बात नहीं है! वे मुझे पकड़ नहीं सकते, क्योंकि मैं बहुत तेज़ हूँ। हमारे पास यहाँ पूरा खाना है, क्यों न हम यहीं रहें?"

नीली मछली ने फिर समझाया, "लेकिन, हमें कल सिर्फ एक दिन के लिए यहाँ से सुरक्षित स्थान पर चले जाना चाहिए!"

पीली मछली ने नीली मछली की बात से सहमति जताई और कहा, "मैं भी नीली मछली से पूरी तरह सहमत हूँ। यह हमारा घर है, लेकिन हमारी सुरक्षा सबसे पहले होनी चाहिए।"

दोनों मछलियाँ अपने दोस्तों को समझाने की पूरी कोशिश करती हैं, लेकिन लाल मछली और बाकी किसी ने भी उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया।

अगले दिन सुबह, मछुआरे नदी में अपना जाल डालने आए और उन्होंने जितनी मछलियाँ पकड़ीं, उनमें से कुछ हरी, कुछ नारंगी, कुछ सफेद और कुछ बहुरंगी थीं। इन मछलियों में से एक लाल मछली भी थी, जिसे मछुआरों ने अपने जाल में फँसा लिया।

मछुआरे आपस में खुशी से कह रहे थे, "यह तो बेहतरीन पकड़ है! इतने समय बाद हमें इतनी सारी मछलियाँ मिली हैं!"

नीली और पीली मछली दूर से यह सब देख रही थीं और बहुत दुखी हो गईं। उन्हें यह देखकर बहुत अफसोस हुआ कि उनकी बात न मानने के कारण लाल मछली भी मछुआरों के जाल में फँस गई थी।

सीख - कहानी की सीख यह है कि हमें अपने दोस्तों की सही सलाह पर अमल करना चाहिए और घमंड नहीं करना चाहिए।
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Short Animal Stories in Hindi
                                                                    नैतिक कहानी - घमंडी बारहसिंगा
Short Stories in Hindi -Ghamandee Barahasinga


एक घने जंगल में एक बारहसिंगा रहता था, जो अपनी सुंदरता पर बहुत घमंड करता था। वह एक दिन तालाब में पानी पीने गया, और जब उसने अपनी परछाई देखी, तो वह अपने बड़े और सुंदर सींगों पर गर्व महसूस करने लगा। लेकिन जैसे ही उसकी नजर उसकी पतली टांगों पर पड़ी, वह दुखी हो गया और भगवान को कोसने लगा, "मेरी टांगें इतनी कमजोर क्यों हैं?"

एक दिन कुछ शिकारी कुत्ते जंगल में आ पहुंचे और उन्होंने बारहसिंगा को देख लिया। कुत्ते उसकी पीछा करने लगे, और घबराकर बारहसिंगा भागने लगा। उसकी पतली टांगें उसे तेजी से दौड़ने में मदद कर रही थीं। लेकिन भागते-भागते अचानक उसकी सुंदर सींग टहनियों में फंस गईं। वह अपनी सींगों को बाहर निकालने के लिए बहुत कोशिश करने लगा, लेकिन नाकाम रहा।

इसी दौरान शिकारी कुत्ते उसे पकड़कर घायल कर दिया और वह मरने की स्थिति में पहुँच गया। मरते समय वह पछता रहा था और सोच रहा था, "मेरे सुंदर सींगों ने मुझे फंसाया, अगर मेरी टांगें मजबूत होतीं तो मैं भाग सकता था।"

सीख - कोई भी चीज अपने गुणों से ही सुंदर होती है।
                                                          नैतिक कहानी - ईमानदार लकड़हारा की कहानी
Short Stories in Hindi - Emanadar Lakadahara Kee Kahanee


एक समय की बात है, एक लकड़हारा जंगल के पास रहता था। वह जंगल से लकड़ी काटकर इकट्ठा करता और फिर उसे पास के बाज़ार में बेचकर अपनी जीविका चलाता था।

एक दिन वह एक पेड़ काट रहा था, जब अचानक उसकी कुल्हाड़ी गलती से पास बह रही नदी में गिर गई। नदी बहुत गहरी और तेज़ बहाव वाली थी, जिससे लकड़हारे को अपनी कुल्हाड़ी ढूँढ़ने में बहुत कठिनाई हो रही थी। वह बहुत कोशिश करने के बाद भी कुल्हाड़ी नहीं पा सका और दुखी होकर नदी के किनारे बैठकर रोने लगा।

लकड़हारे के रोने की आवाज़ सुनकर नदी के भगवान प्रकट हुए और उन्होंने उससे पूछा, "क्या हुआ?"

लकड़हारे ने उन्हें अपनी दुखभरी कहानी सुनाई। नदी के भगवान को उस पर दया आई और उसकी मेहनत और सच्चाई देखकर उन्होंने उसकी मदद करने का वादा किया।

नदी के भगवान पानी में गायब हो गए और कुछ समय बाद एक सुनहरी कुल्हाड़ी लेकर लौटे। उन्होंने कहा, "क्या यह तुम्हारी कुल्हाड़ी है?"

लकड़हारे ने कहा, "नहीं, यह मेरी कुल्हाड़ी नहीं है।"

नदी के भगवान फिर से गायब हो गए और इस बार चांदी की कुल्हाड़ी लेकर लौटे। उन्होंने पूछा, "क्या यह तुम्हारी कुल्हाड़ी है?"

लकड़हारे ने फिर जवाब दिया, "नहीं, यह भी मेरी कुल्हाड़ी नहीं है।"

अब नदी के भगवान ने एक बार फिर पानी में गायब हो गए और जब लौटे तो एक लोहे की कुल्हाड़ी लेकर आए। लकड़हारा इसे देखकर खुश हो गया और मुस्कुराते हुए बोला, "यह मेरी कुल्हाड़ी है!"

नदी के भगवान लकड़हारे की ईमानदारी से बहुत प्रभावित हुए और उसे सोने और चांदी की दोनों कुल्हाड़ियाँ भेंट कर दीं।

सीख - यह कहानी हमें यह सिखाती है कि सच्चाई और ईमानदारी हमेशा पुरस्कार देती है।
                                                                          नैतिक कहानी - चतुर किसान
Moral Stories In Hindi - Chatur Kisaan


एक बार एक किसान नदी के किनारे खड़ा था, उसके पास एक बकरी, एक घास का गट्ठर और एक शेर था। उसे इन तीनों को नाव से नदी पार करनी थी, लेकिन नाव बहुत छोटी थी और एक बार में वह इनमें से केवल एक ही चीज़ को ले जा सकता था। उसे यह समस्या थी कि यदि वह शेर को पहले ले जाता, तो बकरी घास खा जाती, और अगर वह घास का गट्ठर ले जाता तो शेर बकरी को खा जाता।

किसान काफी सोचने के बाद परेशान होकर जमीन पर बैठ गया, लेकिन थोड़ी देर में उसे इसका समाधान मिल गया। उसने सबसे पहले बकरी को नाव में बैठाया और नदी के उस पार छोड़ आया। फिर वह शेर को लेकर नदी पर वापस आया, लेकिन लौटते वक्त उसने बकरी को फिर से इस पार ले आया।

अब किसान ने बकरी को इस पार छोड़ दिया और इस बार वह घास का गट्ठर शेर के पास छोड़ आया। इसके बाद वह बिना किसी सामान के खाली नाव में वापस गया और बकरी को लेकर इस पार वापस आ गया।

इस तरह किसान ने अपनी सूझबूझ से बकरी, घास का गट्ठर और शेर को बिना किसी नुकसान के नदी पार कर लिया।

सीख - धैर्य और समझदारी से कठिन कार्य भी सहजता से पूरे किए जा सकते हैं।
                                                          नैतिक कहानी - टोपी बेचने वाला और बन्दर की कहानी
Short Moral Stories - Topee Bechane Vala aur Bandar Kee Kahanee


बहुत समय पहले की बात है, एक छोटे से गाँव में एक टोपी बेचने वाला रहता था। वह पास के गाँवों में जाकर टोपियाँ बेचता था। एक दिन, टोपी बेचने वाला कुछ दिन टोपी बेचने के बाद अपने गाँव वापस लौट रहा था और अपने साथ कई सारी टोपियाँ ले कर जा रहा था।

सफर की थकान और कम सोने की वजह से वह काफी थक चुका था। उसने सोचा कि क्यों न किसी पेड़ के नीचे थोड़ी देर आराम किया जाए।

उसे एक बड़ा पेड़ दिखा, और उसने सोचा, "यह पेड़ अच्छा है, मैं यहाँ थोड़ी देर आराम कर लेता हूँ, फिर जल्दी से गाँव पहुँच जाऊँगा।"

वह पेड़ के नीचे लेट गया और कुछ ही देर में गहरी नींद में सो गया। घंटों सोने के बाद, अचानक वह चौंककर जागा। उसने देखा कि एक ही टोपी उसके पास बची थी, बाकी सभी टोपियाँ गायब हो चुकी थीं। "मेरी टोपियाँ! मेरी टोपियाँ! इन्हें किसने लिया?" वह परेशान होकर चिल्लाया।

तभी उसे पेड़ की शाखाओं से चहचहाने की आवाजें आईं। "आह! ये बंदर हैं!" उसने समझते हुए कहा। उसे अब यकीन हो गया कि बंदरों ने ही उसकी टोपियाँ चुरा ली हैं और अब उन्हें वापस लाना मुश्किल होगा।

फिर उसने मन ही मन सोचा कि उसे बंदरों से अपनी टोपियाँ वापस पाने का कोई तरीका सोचना होगा। कुछ देर बाद उसे एक आइडिया आया।

वह जमीन से अपनी एक टोपी उठाता है और सिर पर पहन लेता है। बंदर उसे देख रहे थे, और जैसे ही उन्होंने उसे टोपी पहने देखा, उन्होंने भी अपनी-अपनी टोपियाँ पहन लीं। टोपी बेचने वाले ने फिर अपनी टोपी उतारी और जमीन पर फेंक दी। यह देख सभी बंदरों ने अपनी टोपियाँ भी उतार कर नीचे फेंक दीं।

अब टोपी बेचने वाला झपटा और सारी टोपियाँ उठाकर तेज़ी से अपने गाँव की ओर भाग गया।

इस तरह, अपनी चतुराई और समझदारी से टोपी बेचने वाले ने बंदरों से अपनी सारी टोपियाँ वापस पा लीं।


सीख - यह कहानी हमें यह सिखाती है कि समझदारी, धैर्य और चतुराई से हम मुश्किल हालात का सामना कर सकते हैं।
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Moral Stories in Hindi
                                                                       नैतिक कहानी - दो मेंढ़क
Short Moral Stories in Hindi - Do Mendhak


एक बार मेंढकों का एक दल पानी की तलाश में जंगल में घूम रहा था। अचानक, दो मेंढक गलती से एक गहरे गड्ढे में गिर गए।

दल के बाकी मेंढक अपने दोस्तों की मदद के लिए चिंतित हो गए। गड्ढा बहुत गहरा था, इसे देखकर उन्होंने उन दोनों से कहा कि गहरे गड्ढे से बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं है और कोशिश करना बेकार है। वे लगातार उन्हें हतोत्साहित करते रहे, जबकि दोनों मेंढक गड्ढे से बाहर निकलने की पूरी कोशिश कर रहे थे। वे जितनी बार भी कूदते, गड्ढे से बाहर नहीं निकल पाते।

जल्द ही, उनमें से एक मेंढक ने दूसरे मेंढकों के शब्दों को गंभीरता से लिया और यह मान लिया कि वे कभी गड्ढे से बाहर नहीं निकल सकते। उसने हार मान ली और अंततः थककर मर गया।

वहीं, दूसरा मेंढक अपनी कोशिश जारी रखता रहा और आखिरकार इतनी ऊंची कूद लगाई कि वह गड्ढे से बाहर निकलने में सफल हो गया। बाकी मेंढक हैरान थे और यह देखकर आश्चर्यचकित हुए कि उसने यह कैसे किया।

असली बात यह थी कि दूसरा मेंढक बहरा था, इसलिए उसने उनके हतोत्साहवाले शब्द नहीं सुने। उसने सोचा कि बाकी मेंढक उसे उत्साहित कर रहे हैं और इसी प्रेरणा से वह कूदने में सफल हुआ।

सीख - दूसरों की राय तब ही आपको प्रभावित करेगी जब आप उस पर विश्वास करेंगे। इसलिए, बाहरी प्रभावों से खुद को कम से कम प्रभावित होने दें और खुद पर विश्वास रखें।
                                                                             नैतिक कहानी - बुद्धिमान साधू
Moral Stories In Hindi - Buddhiman Sadhoo


बहुत समय पहले एक विशाल और भव्य राजमहल था। एक दिन, एक साधु महल के द्वार पर आया और द्वारपाल से कहा, "जाओ और राजा से कह दो कि उनका भाई उनसे मिलने आया है।"

द्वारपाल थोड़ी देर के लिए चकरा गया। उसने सोचा, "यह साधु के रूप में कौन हो सकता है, जो राजा को अपना भाई बता रहा है?" फिर उसने सोचा कि हो सकता है यह कोई दूर का रिश्तेदार हो जिसने सन्यास ले लिया हो। इसलिए, द्वारपाल महल के अंदर गया और राजा को सूचना दी। राजा मुस्कुराए और बोले, "उसे अंदर भेज दो।"

साधु अंदर आया और राजा से बोला, "कैसे हो भैया?"

राजा ने खुशी से जवाब दिया, "मैं ठीक हूँ, तुम कैसे हो?"

साधु ने कहा, "मेरा महल बहुत पुराना हो गया है। कभी भी यह गिर सकता है। मेरे 32 नौकर थे, लेकिन वे एक-एक करके चले गए।"

राजा ने यह सुनकर सोने के 10 सिक्के देने का आदेश दिया, लेकिन साधु ने कहा, "यह बहुत कम है।"

राजा ने आश्चर्यचकित होकर कहा, "तुम चाहो तो और भी ले सकते हो, लेकिन अभी तो इतना ही दे सकता हूँ।" इसके बाद, साधु सिक्के लेकर वहाँ से चला गया।

जब साधु महल से चला गया, तो मंत्रियों के मन में कई सवाल उठने लगे। उन्होंने राजा से पूछा, "महाराज, हमारे अनुसार तो आपका कोई भाई नहीं है, तो आपने उस साधु को इतना बड़ा इनाम क्यों दिया?"

राजा ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, "देखो, भाग्य के दो पहलू होते हैं – एक राजा का और दूसरा रंक का। उसी तरह, साधु ने मुझे भाई कहा क्योंकि वह मेरी स्थिति के बारे में जानता था।"

राजा ने समझाया, "जब वह कहता है कि उसका महल पुराना है, तो उसका मतलब था कि उसका शरीर बूढ़ा हो गया है। और 32 नौकरों से उसका मतलब था उसके 32 दांत। समंदर के बारे में जो वह कह रहा था, वह सिर्फ मुझे उलझाने का तरीका था। असल में, वह मुझे यह बताने की कोशिश कर रहा था कि मैं उसे 10 सोने के सिक्के दे रहा था, जबकि मेरी हैसियत तो उसे सोने से तोलने की थी।"

राजा ने आगे कहा, "अब मैं उसे अपना सलाहकार नियुक्त करूंगा, क्योंकि उसने मुझे जीवन और अपनी स्थिति के बारे में सिखाया।"

इस प्रकार, राजा ने साधु की समझदारी को पहचाना और उसे सम्मानित किया, साथ ही उसे अपनी सलाहकार की भूमिका भी दी।

सीख - किसी भी व्यक्ति की बुद्धिमत्ता का आकलन उसके बाहरी रंग-रूप से नहीं किया जा सकता।
                                                                   नैतिक कहानी - भूखी लोमड़ी की कहानी
Story For Kids In Hindi - Bhookhee Lomri Kee Kahanee


एक बार एक जंगल में एक लोमड़ी को बहुत ज़ोर की भूख लगी। उसने पूरे जंगल में इधर-उधर तलाश की, लेकिन कहीं भी खाने के लिए कुछ नहीं मिला। वह बहुत मेहनत से शिकार करने की कोशिश करती रही, लेकिन कुछ भी हासिल नहीं हुआ।

काफी समय बाद, जब उसका पेट गड़गड़ाने लगा, तो वह एक किसान के बाड़े के पास पहुँची। बाड़े की दीवार पर चढ़कर उसने देखा कि वहाँ बहुत सारे बड़े और रसीले अंगूर लटके हुए हैं। वे अंगूर देखे में काफी ताजे और आकर्षक लग रहे थे, और लोमड़ी को लगा कि वे खाने के लिए बिलकुल तैयार हैं।

अंगूरों तक पहुँचने के लिए उसने एक ऊँची छलांग लगाई, लेकिन जैसे ही उसने कूदकर मुंह खोला, वह चूक गई। उसने फिर से कोशिश की, लेकिन फिर भी असफल रही। लोमड़ी ने कई बार कोशिश की, लेकिन हर बार वह अंगूर से दूर रह गई।

आखिरकार, उसने हार मान ली और सोचा कि अब और कोशिश नहीं करनी चाहिए। वह वहां से जाने लगी और मन ही मन बुदबुदाई, "मुझे यकीन है कि अंगूर वैसे भी खट्टे होंगे।"

सीख - हमें पुरा प्रयास करना चाहिए ना की अपनी गलतियों या असफलताओं का दोष दूसरों पर नहीं डालना चाहिए।
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Hindi short stories with moral for kids
                                                                 नैतिक कहानी - चींटियाँ और टिड्डे की कहानी
Short Stories in Hindi - Cheentiyan aur Tidde kee Kahanee


बहुत समय पहले की बात है, एक जंगल में चींटियाँ और एक टिड्डा रहते थे। जैसे ही पतझड़ का मौसम खत्म होने वाला था, चींटियों का एक परिवार सर्दी से बचने के लिए भोजन, लकड़ी और सूखे पत्ते इकट्ठा करने में व्यस्त था।

दूर से टिड्डा देख रहा था कि चींटियाँ इतनी मेहनत से काम कर रही थीं। वह वहीं धूप में आराम कर रहा था। उसे एक विचार आया और वह चींटियों के पास गया। उसने हंसते हुए पूछा, "इतने अच्छे दिन हैं, तुम लोग क्या कर रही हो?"

एक चींटी ने जवाब दिया, "हम सर्दी के लिए तैयार हो रहे हैं। आपको भी कुछ खाना इकट्ठा करना चाहिए, ताकि सर्दी में परेशान न हो!"

टिड्डा चींटी की बात सुनकर हंसा और मुँह बिचकाते हुए वहां से चला गया। वह सूरज की गर्मी और तितलियों के पीछे भागने लगा, जबकि चींटियाँ अपनी मेहनत में लगी रही।

दिन बीतते गए और टिड्डा सुस्ती से अपना समय बिता रहा था। एक दिन अचानक ठंडी सुबह आई, और ज़मीन बर्फ से ढकी हुई थी। टिड्डा अपने भोजन की तलाश में इधर-उधर उछलता फिर रहा था, लेकिन उसे कहीं कुछ नहीं मिला। भूखा-प्यासा, वह अपना दिन बिना किसी भोजन के गुजारने लगा।

अब उसे एहसास हुआ कि चींटियाँ सही थीं। उसने अपनी गलती समझी और अगले साल से काम के समय में आलस्य नहीं करने का संकल्प लिया।

सीख - समय किसी का इंतजार नहीं करता। हमें मौकों का सही उपयोग करना चाहिए और आज ही,कल के लिए तैयारी करनी चाहिए।
                                                                         नैतिक कहानी - लालची कुत्ता
Story For Kids In Hindi - Lalachee Kutta


एक बार एक कुत्ते को बहुत जोर की भूख लगी। वह खाने की तलाश में इधर-उधर दौड़ रहा था।

अचानक, उसे रास्ते में एक बड़ी रसीली हड्डी दिखाई दी। कुत्ते ने खुशी-खुशी उस हड्डी को मुँह में दबाया और घर की ओर चल पड़ा।

घर जाते वक्त उसे एक नदी पार करनी पड़ी। जैसे ही वह नदी के किनारे पहुँचा, उसे पानी में अपनी परछाई दिखी। कुत्ते ने सोचा, "यह तो दूसरा कुत्ता है, जिसके मुँह में एक और हड्डी है! क्यों न इसे भी छीन लूं?"

कुत्ते ने गुस्से में आकर अपने मुंह को खोला और दूसरे कुत्ते की हड्डी लेने के लिए दौड़ा। जैसे ही उसने अपना मुंह खोला, उसकी मुँह में जो हड्डी थी, वह पानी में गिर गई और डूब गई। पानी में हलचल से उसकी परछाई भी गायब हो गई।

अब कुत्ते को समझ में आया कि वह खुद अपनी हड्डी खो बैठा था। वह निराश होकर वापस घर लौट आया और उस रात भूखा ही सो गया।

सीख - कहानी की सीख यह है कि लालच के कारण हमारे पास जो चीजें होती हैं, वे भी हाथ से निकल जाती हैं। इसलिए, संतुष्ट रहना चाहिए।
                                                                   नैतिक कहानी - सुनहरे हंस की कहानी
Short Animal Stories in Hindi - Sunahare Hans Kee Kahanee


बहुत पुराने समय की बात है, एक सुंदर झील के किनारे एक हंस रहता था। इस हंस के पंख सुनहरे और बहुत ही खूबसूरत थे।

उसी झील के पास एक बूढ़ी औरत अपनी बेटियों के साथ रहती थी। वे बहुत मेहनत करती थीं, लेकिन फिर भी उनका जीवन गरीबी में ही बीत रहा था।

एक दिन हंस ने सोचा, "क्यों न मैं इस बुज़ुर्ग महिला और उसके परिवार की मदद करूं? मैं उन्हें एक सुनहरा पंख दूँ, जिसे वे बेचकर अपनी ज़िंदगी बेहतर बना सकें।"

हंस ने अपनी योजना पर काम किया और अगले दिन वह बुज़ुर्ग महिला के पास पहुँचा।

बूढ़ी औरत ने हंस को देखा और कहा, "मेरे पास तुम्हारे लिए कुछ नहीं है!"

हंस मुस्कराया और कहा, "लेकिन, मेरे पास तुम्हारे लिए कुछ है!" फिर उसने अपनी योजना को बुज़ुर्ग महिला को समझाया।

बूढ़ी औरत को हंस की बात पसंद आई और उसने तय किया कि वह हंस की मदद स्वीकार करेगी।

अगले दिन, बूढ़ी औरत और उसकी बेटियाँ हंस के दिए हुए सुनहरे पंख को बाजार में बेचने गईं। उस दिन वे काफी पैसा कमा कर घर लौटीं और बहुत खुश हुईं।

अब हंस लगातार उनकी मदद करता रहा। बेटियाँ हंस के साथ खेलती थीं और सर्दी-गर्मी में उसकी देखभाल करती थीं।

समय के साथ-साथ, बुज़ुर्ग महिला का मन और अधिक लालच से भर गया। उसने अपनी बेटियों से कहा, "एक पंख से तो कुछ नहीं होगा, हमें और अधिक पंख चाहिए। कल जब हंस आए, तो उसके सारे पंख तोड़ लेना।"

बेटियाँ इस योजना से सहमत नहीं हुईं, लेकिन माँ ने उन्हें इसके लिए मजबूर किया।

अगले दिन, जैसे ही हंस आया, बूढ़ी औरत ने उसे पकड़ लिया और उसके पंख तोड़ने लगी। जैसे ही उसने पंखों को तोड़ा, वे सफेद हो गए।

बूढ़ी औरत को यह देखकर बहुत दुःख हुआ और वह रोने लगी, लेकिन हंस ने कहा, "तुमने मेरी इच्छाओं के बिना मेरे पंख तोड़ने की कोशिश की, इसलिए ये अब सफेद हो गए।"

यह कहकर हंस गुस्से में उड़ गया और फिर कभी उस झील में वापस नहीं आया।

सीख - अत्यधिक लोभ से बहुत हानि होती है। हमें जो कुदरती रूप से मिलता है, उसमें संतुष्ट रहना चाहिए और मेहनत से अधिक संसाधन जुटाने के लिए प्रयास करना चाहिए।
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Short Stories in Hindi
                                                            नैतिक कहानी - सोने का अंडा देने वाली मुर्गी की कहानी
Short Stories in Hindi - Sone ka Anda Dene Valee Murgee Kee Kahanee


एक गाँव में एक मुर्गी पालन करने वाला अपने पत्नी के साथ रहता था। वह रोज़ बाजार जाकर मुर्गियाँ खरीदता और घर आकर उनकी अच्छी देखभाल करता था।

एक दिन की तरह उसने एक मुर्गी खरीदी और उसे बहुत प्यार से पाला। धीरे-धीरे वह मुर्गी स्वस्थ और तंदुरुस्त हो गई। कुछ महीने बाद उस मुर्गी ने एक अंडा दिया, लेकिन यह अंडा अन्य अंडों से अलग था। यह सोने का था!

यह देखकर व्यापारी और उसकी पत्नी बहुत चकित हुए। वे दोनों बहुत खुश हुए क्योंकि यह सोने का अंडा उन्हें बहुत सारा धन दे सकता था। मुर्गी ने हर दिन सोने का अंडा देना शुरू कर दिया और व्यापारी और उसकी पत्नी उसे बेचकर बहुत पैसे कमाने लगे।

लेकिन कुछ समय बाद उनकी इच्छाएँ और भी बढ़ने लगीं। उन्हें सोने के अंडे के बारे में इतना लालच हो गया कि व्यापारी ने सोचा, "अगर यह मुर्गी हर दिन एक सोने का अंडा देती है, तो इसका पेट कितना सोने से भरा होगा?"

इस सोच के साथ व्यापारी और उसकी पत्नी ने मुर्गी को मार डालने का फैसला किया। उन्होंने सोचा कि यदि वे मुर्गी का पेट खोलेंगे, तो शायद उसमें और भी सोने के अंडे होंगे। जब उन्होंने मुर्गी का पेट चीरकर देखा, तो वे हैरान रह गए क्योंकि उसमें कोई भी सोने का अंडा नहीं था।

अब उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ। उन्होंने अपनी लालच के कारण मुर्गी को मार डाला और अब सोने के अंडे भी नहीं मिलेंगे। वे दोनों बहुत पछताए, लेकिन अब कुछ भी बदल नहीं सकता था।

सीख - लालच करना बुरी बला है.
                                                                  नैतिक कहानी - एकता की शक्ति
Story For Kids In Hindi - Ekata Kee Shakti


एक किसान के पांच बेटे थे, लेकिन वे हमेशा आपस में लड़ते रहते थे और भाईचारे की भावना नहीं रखते थे। यह देखकर उनका पिता चिंतित रहता था। एक दिन जब किसान अपनी अंतिम घड़ी में था, तो उसने अपने सभी बेटों को बुलाया और एक गट्ठर पतली लकड़ियाँ उन्हें दिया। वह बोला, "तुम सब मिलकर इन लकड़ियों का गट्ठर तोड़ो।"

सभी बेटे मिलकर गट्ठर को तोड़ने की कोशिश करते हैं, लेकिन वे उसमें सफल नहीं होते। तब किसान ने कहा, "अब तुम सब एक-एक लकड़ी ले आओ और उसे तोड़ो।" जैसा कि उसने कहा, उन्होंने लकड़ियाँ तोड़ी और वे सभी जल्दी से टूट गईं।

किसान ने देखा और कहा, "देखो बेटों, यह गट्ठर जब एक साथ था, तो कोई भी उसे नहीं तोड़ पाया क्योंकि उन लकड़ियों में एक साथ मिलकर शक्ति थी। लेकिन जब तुमने एक-एक लकड़ी को अलग किया, तो वह तुरंत टूट गई।"

फिर किसान ने उन्हें समझाया, "तुम भी अगर आपस में एकजुट रहोगे, तो कोई तुम्हें नहीं हरा सकता और तुम सभी ताकतवर रहोगे। लेकिन अगर तुम एक-दूसरे से लड़ोगे और अलग रहोगे, तो तुम भी इन लकड़ियों की तरह टूट जाओगे।"

किसान की बातों ने उसके बेटों को बहुत गहरी सीख दी। इसके बाद, वे हमेशा एकजुट रहे और आपस में प्यार और भाईचारे से रहने लगे। किसान भी अब अपने अंतिम समय में शांति और सुख से जीने लगा।


सीख - एकता में शक्ति होती है.
                                                                      नैतिक कहानी - लालची बंदर
Short Animal Stories in Hindi - Lalachee Bandar


एक बंदर रोज़ एक आदमी के घर आता और घर में खलल डालता। कभी वह कपड़े फाड़ देता, कभी बर्तन तोड़ता, कभी बच्चों को परेशान करता। उसने खाने-पीने की चीजें भी चुराई, लेकिन घर वाले कभी उससे शिकायत नहीं करते थे। हालांकि, वे उस बंदर से बहुत तंग आ चुके थे।

एक दिन घर के नौकर ने सोचा, "मैं इस बंदर को पकड़कर बाहर निकाल लाऊंगा।" जब सभी घर वाले बाहर गए, तब वह मौका देखकर बंदर को पकड़ने की कोशिश करने लगा। जैसे ही बंदर घर में घुसा और कुछ देर बाद वह सुरई (पतला मटका) में रखे हुए छोले देखता है, तो उसे खाने की लालच हो गई।

बंदर ने सुरई में हाथ डालकर एक मुट्ठी चना निकाल लिया, लेकिन सुरई का मुंह इतना पतला था कि मुट्ठी बाहर नहीं निकली। बंदर ने बहुत जोर से खींचा और कूदने लगा, लेकिन उसने चने को छोड़ने का नाम नहीं लिया।

इतने में नौकर ने उसे रस्सी से बांधकर बाहर निकाल लिया। बंदर अपनी लालच के कारण फंस गया और पकड़ा गया।

सीख - लालच बुरी बला है.
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Short Moral Stories in Hindi
                                                         नैतिक कहानी - बंदर और मगरमच्छ की कहानी
Moral Stories In Hindi - Bandar aur Magaramachchh Kee Kahanee


बहुत समय पहले एक बड़ा जंगल था, जिसके पास एक नदी बहती थी। नदी के किनारे एक जामुन का पेड़ था, जिस पर एक बंदर रहता था। वह रोज़ जामुन खाता और खुश रहता। एक दिन उसने नदी के किनारे एक मगरमच्छ को आराम करते देखा। मगरमच्छ थका हुआ और भूखा लग रहा था।

बंदर को लगा कि शायद मगरमच्छ भूखा है, इसलिए उसने कुछ जामुन मगरमच्छ को दिए। मगरमच्छ ने खुशी से जामुन खाए और बंदर का धन्यवाद किया। जल्दी ही दोनों अच्छे दोस्त बन गए और वे एक-दूसरे के साथ समय बिताने लगे। अब बंदर रोज़ मगरमच्छ को जामुन देता था, और वे दोनों मिलकर आनंद से जामुन खाते थे।

एक दिन बंदर ने मगरमच्छ को और अधिक जामुन दिए ताकि वह अपनी पत्नी के लिए ले जा सके। मगरमच्छ घर पहुँचकर अपनी पत्नी को जामुन देता है। मगरमच्छ की पत्नी जामुन के स्वाद से बहुत खुश हो गई, लेकिन उसके मन में बुरी योजनाएँ पनपने लगीं। उसने अपने पति से कहा, "अगर ये जामुन इतने मीठे हैं, तो उस बंदर का दिल तो और भी मीठा होगा! मुझे उसकी दिल चाहिए।"

मगरमच्छ पहले तो संकोच करता है, लेकिन फिर वह अपनी पत्नी की बात मानने का फैसला करता है। दोनों ने मिलकर बंदर को मारने की योजना बनाई।

अगले दिन मगरमच्छ ने बंदर को बताया कि उसकी पत्नी ने उसे अपने घर बुलाया है ताकि वह उस मीठे जामुन का स्वाद चख सके। दोनों नदी के रास्ते मगरमच्छ के घर की ओर जाने लगे। मगरमच्छ ने बंदर को अपनी पीठ पर बैठाकर नदी पार करने का प्रस्ताव दिया। जब वे थोड़ी दूर तक गए, तो मगरमच्छ ने बंदर को बताया कि उसकी पत्नी उसका दिल खाना चाहती है।

यह सुनकर बंदर डर गया, लेकिन उसने तुरंत अपने दिमाग का इस्तेमाल करना शुरू किया। बंदर ने मगरमच्छ से कहा, "तुमसे यह कहूँ, मेरा दिल तो मैंने जामुन के पेड़ पर छोड़ दिया था। तुम्हारी पत्नी अगर मेरी दिल चाहती है, तो उसे वह पेड़ पर जाकर लानी होगी।"

यह सुनकर मगरमच्छ को लगा कि यह सच है, और वह खुश होकर बंदर को लेकर पेड़ के पास वापस लौटने लगा। पेड़ के पास पहुँचते ही बंदर तेजी से पेड़ पर चढ़ गया। फिर उसने नीचे से मगरमच्छ से कहा, "क्या कोई दिल पेड़ पर छोड़ सकता है? दिल तो शरीर के अंदर होता है, और इसके बिना कोई भी जीवित नहीं रह सकता। तुमने मेरी मदद से अपनी दोस्ती तोड़ी, अब हम कभी दोस्त नहीं बन सकते।"

मगरमच्छ को अपनी गलती का एहसास हुआ और वह दुखी होकर अपनी पत्नी के पास लौट आया। बंदर ने समझदारी से अपनी जान बचा ली और अपने अच्छे दोस्त को खोने के बाद भी उसने अपनी चालाकी से अपनी सुरक्षा की।

सीख - हमें दोस्तों को सावधानी से चुनना चाहिए और बिना परखे किसी बहकावे में नहीं आना चाहिए। मुसीबत के समय धैर्य और बुद्धि से काम लें और अपने दोस्तों के साथ धोखा नहीं करना चाहिए।

निष्कर्ष –

नैतिक कहानियाँ ( Moral Stories in Hindi ) वह कहानी होती है, जिसका मुख्य उद्देश्य जीवन में अच्छे नैतिक मूल्यों को सिखाना और दूसरों को सही मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करना होता है। इन कहानियों में एक संदेश या शिक्षा छिपी होती है, जिसे हम अपने जीवन में लागू कर सकते हैं।

नैतिक कहानियाँ हमें यह सिखाती हैं कि हमें हमेशा अच्छाई, ईमानदारी, मेहनत, धैर्य, और सहानुभूति जैसे सकारात्मक गुणों का पालन करना चाहिए। इनमें अक्सर किसी नायक या पात्र के अच्छे या बुरे कामों के परिणामों के माध्यम से यह समझाया जाता है कि सही या गलत चुनाव करने से क्या फर्क पड़ता है।

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